संदेश

#वैशाली महोत्सव #वैशाली महोत्सव के बारे में #vaishali mahotsav #vaisali mahotsav ke bare men

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भूमिका संत रविदास जी ने भी क्या खूब कहा है- “मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है” जैसे कि हमारे वर्द्धमान, जो अपने कर्म से भगवान महवीर बनें और जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर के रूप में प्रतिष्ठित हुए | अहिंसा परमो धर्म : जैसे उपदेश देकर जनमानस के लिए एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में सामने आए, की पुजनीय, बंदनीय हो गए | ऐसे धरती के लाल के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर प्रत्येक वर्ष वैशाली वासी, वैशाली महोत्सव मनाकर भगावन महाबीर के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था प्रकट करते है और वैशाली वासी बड़े प्यार से कहते है -       हम भगवान महाबीर की शुभ जयंती मनाते है,       हम आस्था भगवान महाबीर के प्रति दिखाते है “ |   वैशाली महोत्सव मनाने की परम्परा की शुरुआत स्वर्गीय जगदीश चंद्र माथुर हाजीपुर के एक तत्कालीन अनुमंडलाधिकारी थे, जिनके हृदय में वैशाली के महत्व और महत्ता की ऐसी अखंड ज्योत जल रही थे, जिसके प्रकाश से अभिभूत होकर वैशाली के प्रति अपनी आस्था को, वैशाली महोत्सव मनाने की परम्परा के रूप में प्रकट कर दिया और वैशाली की मिट्टी की खुश...

#‘आजादी का अमृत महोत्सव’ देश की उन्नति के लिए एक बेहतर संदेश |#Azadi Ka Amrit Mahotsav' is a better message for the progress of the country.#'azadi ka amrit mhotsav'desh ki unnti ke liye ek behtr sndesh

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  प्रस्तावना जीवन में समृद्धि प्राप्त करने के लिए किन – किन मुसीबतों का सामना करना पड़ता है ,कौन – कौन सी इच्छाओं की तिलांजली देनी पड़ती है ,कौन – कौन से लोग सफर के साथी बनते है , किन – किन लोगों का साथ बीच मझदार में ही छूट जाता है , जीवन में ऐसे कम ही मौकें मिलते है जब शान्ति से बैठकर अपने बीते दिनों को याद किया जा सके और अपनी उपलब्धी या अनुपलब्धि के महत्व को पुन: मानसिक पटल पर जीवंत किया जा सके | उपर्युक्त बातें व्यक्तिगत बाधा को परिभाषित कर रही है जो स्वयं के बनाये घर से स्वयं ही निकल नहीं पाने के दर्द को बयाँ कर रही है या स्वयं के बनाये घर में ,स्वयं ही अपनी मरजी का कुछ नही कर पाने की पीड़ा को उजागर कर रही है | तो जरा सोचिये, एक इंसान जब अपनी जद्दोजहद से भरी जिन्दगी में इतना डूबा हुआ है, जिसे अपने अतीत के बारे में सोचने या चर्चा करने तक की फुरसत नहीं है, क्या वह देश की आजादी में बलिदानों की भेंट चढ़े हुए अमर सपूतों के बारे में या स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानने के लिए स्वयं से कुछ पल निकाल पायेगा ! मेरी समझ से तो बिल्कुल भी नहीं ! इसीलिए मेरी समझ से ‘आजादी का अमृ...

#प्रारम्भिक शिक्षा पर मातृभाषा का प्रभाव एक दृष्टि में | # prarmbhik shiksha pr matribhasha ka prbhav ek drishti men | # The impact of mother tongue on elementary education at a glance.

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  मातृभाषा मातृभाषा को अगर सरल शब्दों में परिभाषित करे तो हम कह सकते है की जो भाषा हमारे जन्म से हमारे कानों में पड़ती है या जो भाषा हमारे अपने घर परिवार और हमारे आस - पास के माहौल में जन्म जन्मान्तर से विद्यमान है,  वहीं हमारी अपनी भाषा या मातृभाषा है | अक्सर लोग राष्ट्र भाषा को ही अपनी मातृभाषा समझते है लेकिन राष्ट्रभाषा और मातृभाषा में विशेष अंतर होता है, जिसे समझना आवश्यक है | राष्ट्रभाषा, एक राष्ट्र की भाषा होती है, जो समस्त राष्ट्र के क्रियाकलापों से लेकर, क्रियान्वयन तक कानूनी रूप से वैध्य मानी जाती है| वहीं मातृभाषा, एक राष्ट्र के विभिन्न वर्गों की, विभिन्न भाषा हो सकती है जैसे कोई बंगाली भाषी है तो उसकी मातृभाषा बंगाली होगी , अगर कोई तेलगु , उड़िया , तमिल,अंग्रेजी भाषी है तो उसकी मातृभाषा क्रमशः तमिल , तेलगु , उड़िया,अंग्रेजी इत्यादि होगी | वर्ष 2011 की भाषा आधारित जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, हिन्दी भाषी लोगों की संख्या 52.8 करोड़ है, जो सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है, और इसीलिए राष्ट्रभाषा भी है, वहीं दूसरे स्थान पर बंगाली भाषा है जिसकी संख्या 9.27 करोड़ है | ...

#पर्यावरण क्या है और अब तक पर्यावरण संरक्षण हेतु कौन - कौन से कदम उठाए गये है ?# pryavran kya hai , or ab tak pryavran snrakshn hetu kaun - kaun se kdam uthayen gyen hai ?

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अक्सर हम पेड़ – पौधों को ही पर्यावरण का मुख्य घटक समझते है, और अपने  आस – पास की तमाम चीजों को नजरअंदाज कर देते है, जबकि हम जहाँ  साँस लेते है या हम जहाँ रहते है ,हमारे आस – पास की तमाम चीजें पर्यावरण का ही हिस्सा है,  क्योंकि पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ ही होता है चारों तरफ से घिरा हुआ , इसीलिए हम कह सकते है जो वस्तुयें या गैस सदृश्य रूप में या अदृश्य रूप में हमारे चारों तरफ विद्यमान है, मुल रूप से वही हमारा पर्यावरण है या वहीं हमारी असल आवो – हवा,वातावरण है |  अब वह प्राकृतिक या मानवनिर्मित हो सकता है,इसमें कोई संसय नहीं है, क्योंकि प्रकृति जहाँ इस समस्त ब्रह्मांड की मुल रचनाकार है, वहीं मानव अपनी बढ़ती आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए एक अदना कलाकार है, जो उपलब्ध संसाधनों को   अपने तकनीकी ज्ञान से भिन्न – भिन्न चीजों में परिवर्तित करता रहता है और  जीवन को तकनीकों से जोड़कर सुविधाजनक बनाने का काम करता है | लेकिन कभी – कभी इसके दुष्परिनाम भी सामने आते है जिसको यदि समय रहते दूर किया जाये, तो जीवन पर मंडराते पर्यावरण विघटन के काले बादल को हटाया जा सकता है | इस दिशा में ...

धरती से मीठे पानी का स्तर धीरे – धीरे कम क्यों हो रहा है ? Why is the level of fresh water gradually decreasing from the earth?

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              “एक घूंट को प्यासी धरती , एक घूंट को प्यासे हम   रह जायेंगे अगर  करेंगे, यूँ  ही  बर्बाद  पानी  हम” वैसे तो पृथ्वी का तीन चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है , फिर भी दिन प्रति दिन पानी की बढ़ती आवश्यकताओं और पानी की कम होती उपलब्धताओं की समस्याओं के इर्द गिर्द ही जीवन चक्र घूमता नजर आता है | और ऐसा होना भी स्वभाविक ही है क्योंकि पृथ्वी का तीन चौथाई भाग जो जल से घिरा हुआ है या पृथ्वी पर जितना भी पानी उपलब्ध है उसका 97% भाग समुंद्र में खड़े पानी के रूप में है और शेष में से भी  2.5 प्रतिशत भाग वर्फ के रूप में या उनसे निकलने वाली नदियों के रूप में है अब मात्र .5 प्रतिशत भाग ही मीठे पानी के रूप में उपलब्ध है ,जिसे देखते हुए आसानी से ये अंदाजा लगाया जा सकता है की भविष्य में पीने योग्य पानी की घोर किल्लत होने वाली है|   मीठे पानी के प्रमुख श्रोत नदी , झरना, नहर, कुआँ , भूमिगत जल इत्यादी जो मीठे पानी के प्रमुख एवं स्थायी श्रोत है जबकि अस्थाई श्रोत वर्षा का पानी है जो की अत्यधिक मीठे पानी का श्रोत है जिसे यदि अगर ...

इंजिनियरिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद जॉब नहीं मिलने की स्थिति में क्या करना चाहिए ? What should I do if I do not get a job after graduation in engineering?

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ऐसे सवाल हजारों विद्यार्थियों के मन में होते है जिसके जवाब ढूंढने के लिए बच्चें प्रयासरत रहते है , मैंने भी कई जगह ऐसे सवाल देखें, जिसे देखकर मुझे लगा क्यूँ ना ऐसे विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर एक ब्लॉग लिखा जाये जो इंजिनियरिंग में ग्रेजुएशन या बीटेक करने के बाद भी अच्छी जॉब ना मिलने से परेशान है या छोटी – मोटी या कम सैलरी वाली नौकरी मिलने से ह्तोस्ताहित है क्योंकि इंजिनियरिंग में ग्रेजुएशन या बीटेक करने के बाद भी अगर जॉब नहीं मिलता है तो अक्सर बच्चे ये सोचने लग जाते है की अब ऐसा और क्या करें जिससे जॉब ना मिलने की समस्या दूर या समाप्त हो जाये लेकिन सिर्फ सोचने से तो किसी भी समस्या का हल ना ही निकला है और ना ही निकलेगा ! हल तो तभी निकलेगा जब सोच को सही दिशा या उचित और स्थिति संगत मार्गदर्शन मिलें जिसके कारण विकास की गति या तो अवरुद्ध है या तो थोड़ी बहुत है तो आइये बिना देरी किये उत्पन्न समस्या की तरफ चलते है जो जॉब नहीं मिलने से सम्बंधित है और जिसका निदान ही इस ब्लॉग को लिखने का मकसद भी है इंजिनियरिंग में ग्रेजुएशन या बीटेक करने के बाद भी अगर जॉब नहीं मिल रहा है या मिल भी रहा है तो जै...