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भूमिका

संत रविदास जी ने भी क्या खूब कहा है-

“मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है”

जैसे कि हमारे वर्द्धमान,

जो अपने कर्म से भगवान महवीर बनें और जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर के रूप में प्रतिष्ठित हुए |

अहिंसा परमो धर्म : जैसे उपदेश देकर जनमानस के लिए एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में सामने आए, की पुजनीय, बंदनीय हो गए |

ऐसे धरती के लाल के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर प्रत्येक वर्ष वैशाली वासी, वैशाली महोत्सव मनाकर भगावन महाबीर के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था प्रकट करते है और वैशाली वासी बड़े प्यार से कहते है -

      हम भगवान महाबीर की शुभ जयंती मनाते है,

      हम आस्था भगवान महाबीर के प्रति दिखाते है “ |

 

वैशाली महोत्सव मनाने की परम्परा की शुरुआत

स्वर्गीय जगदीश चंद्र माथुर हाजीपुर के एक तत्कालीन अनुमंडलाधिकारी थे, जिनके हृदय में वैशाली के महत्व और महत्ता की ऐसी अखंड ज्योत जल रही थे, जिसके प्रकाश से अभिभूत होकर वैशाली के प्रति अपनी आस्था को, वैशाली महोत्सव मनाने की परम्परा के रूप में प्रकट कर दिया और वैशाली की मिट्टी की खुशबू को पूरी दुनिया में बिखेर दिया |

जब कारवां निकलता है तो लोग खुद ब खुद जुड़ जाते है | ठीक वैसे ही स्वर्गीय जगदीश चंद्र माथुर के कारवाँ में भी उपेन्द्र महारथी, प्रख्यात इतिहासकार डा. योगेन्द्र मिश्र और जग्गनाथ प्रसाद साह इत्यादि जैसे योग्य और कुशल व्यक्तित्व के धनी लोगों का साथ मिला जिनके अथक प्रयास से 31 मार्च 1945 को प्रथम वैशाली महोत्सव की शुरुआत हुई | वैशाली महोत्सव की निरंतरता और वैशाली का विकास कभी वाधित न हो इसके लिए भी 31 मार्च 1945 को ही वैशाली संघ की स्थापना की गई|

      “ खिल उठता है तन – मन ऐसे अवसर त्योहार से,

        गूंज उठता है कण –कण महाबीर के जयकार से “

 


वैशाली महोत्सव मनाने की परम्परा का प्रारूप 

प्रतिवर्ष तीन दिवसीय वैशाली महोत्सव का आयोजन महाबीर जयंती(बैसाख पूर्णिमा) के शुभ अवसर पर किया जाता है और इसे एक राजकीय उत्सव के रूप में मनाया जाता है | महोत्सव की शुरुआत बड़े ही धूमधाम से एक शोभा यात्रा से होती है जो भगवान महबीर के ननिहाल बाबन पोखड़ के पास स्थित जैन मंदिर से , शुरू होकर भगवान महाबीर के जन्म स्थल वासो कुंड तक जाती है, जिसकी शोभा  देखते बनती है |  इस महोत्सव के और भी रंग है जिसमें देशभर के कलाप्रेमी हिस्सा लेते है और महोत्सव को एक उत्सव का रूप देकर अपनी आस्था प्रकट करते है |



      “धन्य धन्य है धरती जहाँ ,धन्य धन्य आसमान है

     धन्य धन्य लोग जहाँ, जहाँ जन्मे महाबीर भगवान है” 

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