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#वैशाली महोत्सव #वैशाली महोत्सव के बारे में #vaishali mahotsav #vaisali mahotsav ke bare men

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भूमिका संत रविदास जी ने भी क्या खूब कहा है- “मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है” जैसे कि हमारे वर्द्धमान, जो अपने कर्म से भगवान महवीर बनें और जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर के रूप में प्रतिष्ठित हुए | अहिंसा परमो धर्म : जैसे उपदेश देकर जनमानस के लिए एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में सामने आए, की पुजनीय, बंदनीय हो गए | ऐसे धरती के लाल के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर प्रत्येक वर्ष वैशाली वासी, वैशाली महोत्सव मनाकर भगावन महाबीर के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था प्रकट करते है और वैशाली वासी बड़े प्यार से कहते है -       हम भगवान महाबीर की शुभ जयंती मनाते है,       हम आस्था भगवान महाबीर के प्रति दिखाते है “ |   वैशाली महोत्सव मनाने की परम्परा की शुरुआत स्वर्गीय जगदीश चंद्र माथुर हाजीपुर के एक तत्कालीन अनुमंडलाधिकारी थे, जिनके हृदय में वैशाली के महत्व और महत्ता की ऐसी अखंड ज्योत जल रही थे, जिसके प्रकाश से अभिभूत होकर वैशाली के प्रति अपनी आस्था को, वैशाली महोत्सव मनाने की परम्परा के रूप में प्रकट कर दिया और वैशाली की मिट्टी की खुश...

मोबाईल फ़ोन के इस्तेमाल से क्या - क्या फायदे और क्या – क्या नुकसान हो सकते है ....?

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    कहते है आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है तो जरा सोचिये अगर हमारी आवश्यकता ही सिमित होती तो क्या एक ऐसा आविष्कार भी हो पाता ·         जो हमें पूरी दुनियाँ से बस चंद सेकेंड्स में ही जोड़ पाती ·         क्या संचार में कभी एक ऐसी क्रान्ति आती जो हमें यूट्यूब से लेकर ब्लॉग तक घर बैठे ही पहुँचने में मदद करती लेकिन आज हम अपनी बढ़ती आवश्यकता से ही इस मुकाम पर पहुँचने में सफल हो पाये है कि – ·         घर बैठे – बैठे ही हम पूरी दुनियाँ से जुड़ सकते है   ·         हम अपनी मनपसन्द की वस्तु घर बैठे – बैठे ही दुनियाँ के किसी भी कोने से खरीद सकते है   ·         हम घर बैठे – बैठे ही अपना बिजनेस चला सकते है ·         हम घर बैठे – बैठे ही पैसों का लेनदेन कर सकते है ·         हम अपने मन को बहलाने के लिए अपने अनुसार मनोरंजन के...

अपने जीवन को आरामदायक बनाने के लिए क्या उपलब्ध साधनों का उपयोग उचित है और अगर उचित है तो कितना उचित है ..?

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  कहते है इस दुनियाँ में लोग मेहनत ही इसीलिए करते है या कमाते ही इसीलिए है ताकि अपने और अपने परिवार के जीवन को सुविधाजनक या आरामदायक बना सकें उनको इस भाग दौड़ भरी जिन्दगी में इस बात से कोई लेना देना नहीं है कि सुविधाओं के या साधनों के अत्यधिक इस्तेमाल से जीवन को हानि भी हो सकती है वो तो बस इस ताक में रहते है कि कब उनकी जमा पूँजी इतनी हो जाये कि वो एक कार खरीद कर यात्रा सम्बंधित होने वाली परेशानी से खुद को और अपने परिवार को बचा सकें ... या कब उनकी जमा पूँजी इतनी हो जाये कि वो एक एयर कंडिशनर खरीद कर गर्मीं से सम्बंधित होने वाली परेशानी से खुद को और अपने परिवार को बचा सकें इस तरह के ऐसे अनेकों उदाहरण हो सकते है जिनकी पूर्ति के लिए वो लालायित रहते है .. खैर साधन जितना सरल और सुगम होता जायेगा हमारे अंदर मेहनत करने की प्रवृति का हनन उतना ही होता जायेगा जिसके फलस्वरूप हम शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर होते जायेंगे और धीरे – धीरे एक समय ऐसा आयेगा जब हम पूरी तरह साधन पर ही आश्रित हो जायेंगे और हम चाह कर भी खूद को इससे बचा नहीं पायेंगे इसीलिए समय रहते ही आने वाले समय पर विचार करते हुए अपन...

स्वप्न क्या है और क्यों आते है...?

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स्वप्न क्या है और क्यों आते है इसको जानने से पहले हम थोड़ा ये जानने की कोशिश करते है कि स्वप्न का अर्थ क्या होता है क्योंकि जब तक हम किसी भी शब्द का या हमारे जीवन में घटित होने वाली किसी भी घटनाओं का मतलब ही नहीं जानेंगे तब तक उसके बारे में हम क्या समझेंगे और क्या बतायेंगे ..वैसे तो स्वप्न का अर्थ या मतलब स्वप्न शब्द से ही समझ में आता है फिर भी हम इसके अर्थ को विस्तार पूर्वक समझने की कोशिश करते है ताकि किसी प्रकार का कोई संशय शेष ना रह जाये .. तो स्वप्न का अर्थ ही होता है अपनी किसी भी प्रकार की हसरत या चाहत को हकीकत बनते या बिगड़ते अपनी बंद आँखों से ( यहाँ बंद आँखों का मतलब नींद में होने से है ) कल्पना के सागर में डूबकी लगाकर सदृश्य देखना .. और स्वप्न का एक दूसरा अर्थ भी होता है अपने किसी हसरत या चाहत के लिए लालायित रहना या होना लेकिन इस प्रकार के स्वप्न हम खूली आँखों से ही देख सकते है ( यहाँ खूली आँखों से देखना हमरी जागृत अवस्था का घोतक है ) और मेरी समझ से स्वप्न के ये दो ही प्रकार होते है | अब हमने स्वप्न का अर्थ तो समझ लिया लेकिन स्वप्न के अर्थ को समझने के दौरान एक सवाल जो हमा...

बिगड़ते रिश्तों को सम्भालने के लिए क्या करना चाहिए .. या बिगड़े रिश्तों को बचाने में संचार की कितनी भूमिका होती है |

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  रिश्ता चाहे दोस्ती का हो , रिश्ता चाहे प्यार का हो , रिश्ता चाहे मातृत्व का हो ,रिश्ता चाहे पितृत्व का हो ,रिश्ता चाहे खून का हो और यहाँ तक की रिश्ता चाहे औपचारिक ही क्यों ना हो सब रिश्तों की नींव संचार पर ही टिकी होती है और रिश्तों की अहमियत ही हमें रिश्तों की डोर थामे रखने में हमारी मदद करती है जिससे हम किसी भी रिश्तें को निभाने के प्रति सजग और सरल रह पाते है और रिश्तों में संचार को बनायें रखते है |      कहते है किसी भी रिश्तों में दरार आने के या बिगड़ने के प्रमुख कारण है हर प्रकार के संचार का बंद हो जाना क्योंकि बातें करते रहने भर से ही बिगड़ी से बिगड़ी बात भी बन जाती है और जब बातें ही नहीं होगी तो रिश्तों में दूरियाँ तो आप ही हो जायेगी इसीलिए मेरी समझ से रिश्तों को बचाये रखने के लिए जरूरी है की अपने रिश्तों में संचार के हर रास्ते को खूले रखने चहिए भले रिश्ते क्यूँ ना बिगड़ते ही जा रहे हो .. ऐसा नहीं है कि सिर्फ बिगड़ी बातें को बनाने के लिए ही हमें संचार की आवश्यकता होती है संचार की आवश्यकता हमें रिश्ते बनाने से लेकर रिश्तों को निभाने या निभाते रहने तक ...

आलस क्यों आता है या आलस हमारे शरीर में किस कारण से उत्पन्न होता है ?

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  जो विचार हमें किसी भी कार्य को कल पर टालने के लिए प्रेरित करने लगे या जो विचार हमें बैठे – बैठे ही अपना काम किसी और से निकलवाने को प्रेरित करने लगे तो समझ जाना चाहिए कि इस प्रकार के विचार को हमारे मन में उत्पन्न होने के पीछे हमारे शरीर में मौजूद आलस का ही हाथ है अगर समय रहते हम अपने शरीर से आलस रूपी कीड़ा को निकालकर नहीं फेंकेंगे तो हमारा स्वभाव दिनप्रतिदिन बिगड़ते – बिगड़ते आलसी स्वभाव का हो जायेगा जो किसी भी तरह से हमारे लिए और हमारे शरीर के लिए ठीक नहीं है ..   तो आलस को हमें अपने शरीर से निकालने के लिए सबसे पहले हमें, हमारे शरीर में आलस के होने के कारणों का पता लगाना होगा .. तो हमारे शरीर में आलस रहने या होने के बहुत से कारण हो सकते है जैसे .. ·         कभी – कभी आलस विटामिन B12 की कमी कारण से भी रह सकता है जिसे दूर करने के लिए हम मछली ,अंडा ,मीट और साबुत अनाज का सेवन करना चाहिए और इम्युनिटी सिस्टम को मजबुत बनाने के लिए और विटामिन D की पूर्ति के लिए मशरूम , अंडे की जर्दी के अलावा सुबह – सुबह की धूप का भी सेवन शुरू करन फायेदेमंद...

त्वचा में निखार लाने के लिए क्या करें .. या त्वचा सम्बंधित रोगों से कैसे बचा जायें ..

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  कभी – कभी हम सोचते है कि कैसे कोई अपनी उम्र से भी आधी उम्र का या अपनी उम्र से भी बड़ी उम्र का दिखता है इसके पीछे ऐसी कौन सी वजह है जिसके कारण ऐसा होता है क्यूँ समय से पहले ही किसी-किसी की त्वचा में झुर्रियां आ जाती है और क्यूँ किसी – किसी की त्वचा में ससमय भी झुर्रियां नही आती है | ये तो सभी जानते है कि प्रत्येक शरीर के अलग - अलग ढांचे , अलग – अलग रंग – रूप और अलग – अलग ही बनावट होती है तो क्या ऐसा शरीर की बनाबट के कारण होता है, या क्या ऐसा कुदरती करिश्मा से संभव होता है, या क्या ऐसा शरीर में किसी विटामिन या प्रोटीन, या कुछ और की कमियों के कारण होता है, या हम जिस आवों हवा में रहते है उसके कारण ऐसा होता है, या हम अपनी उम्र से कम दिखने के लिए कोई उपाय करते है और यही उपायों की मात्रा जब कम या ज्यादा होती है तो उम्र में कम दिखने के बजाए बड़ी उम्र का दिखने लगते है या, कुछ और कारण है इसके पीछे जिसको समझना हमारे बस में नहीं है   ऐसे कई सारे सवाल है जो हमें सोचने पर मजबूर करते है कि त्वचा में इस प्रकार के बदलाव क्यों होते है ... अगर आपलोग भी इसतरह के सवालों ...