#वैशाली महोत्सव #वैशाली महोत्सव के बारे में #vaishali mahotsav #vaisali mahotsav ke bare men
कहते है इस दुनियाँ में लोग मेहनत ही इसीलिए करते है या कमाते ही इसीलिए है ताकि अपने और अपने परिवार के जीवन को सुविधाजनक या आरामदायक बना सकें उनको इस भाग दौड़ भरी जिन्दगी में इस बात से कोई लेना देना नहीं है कि सुविधाओं के या साधनों के अत्यधिक इस्तेमाल से जीवन को हानि भी हो सकती है वो तो बस इस ताक में रहते है कि कब उनकी जमा पूँजी इतनी हो जाये कि वो एक कार खरीद कर यात्रा सम्बंधित होने वाली परेशानी से खुद को और अपने परिवार को बचा सकें ... या कब उनकी जमा पूँजी इतनी हो जाये कि वो एक एयर कंडिशनर खरीद कर गर्मीं से सम्बंधित होने वाली परेशानी से खुद को और अपने परिवार को बचा सकें इस तरह के ऐसे अनेकों उदाहरण हो सकते है जिनकी पूर्ति के लिए वो लालायित रहते है ..
खैर साधन जितना सरल और सुगम होता जायेगा हमारे अंदर मेहनत करने की प्रवृति का हनन उतना ही होता जायेगा जिसके फलस्वरूप हम शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर होते जायेंगे और धीरे – धीरे एक समय ऐसा आयेगा जब हम पूरी तरह साधन पर ही आश्रित हो जायेंगे और हम चाह कर भी खूद को इससे बचा नहीं पायेंगे इसीलिए समय रहते ही आने वाले समय पर विचार करते हुए अपने वर्तमान को सही मार्ग देने के लिए भरसक प्रयास करने के बारे में सोचना शुरू कर देना चाहिए लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं है कि हम साधन के आविष्कार को ही गलत सावित कर रहे है या साधन के इस्तेमाल को ही गलत समझ रहे है मेरे कहने का सिर्फ इतना ही मतलब है कि हम साधनों का उपयोग करें लेकिन उसपर आश्रित रहने के लिए नहीं बल्कि उसका सही उपयोग करने के लिए करें ..चाहे हम लैपटॉप या मोबाईल फ़ोन का इस्तेमाल ही क्यों ना कर रहें हो क्योंकि वक्त के साथ चलना भी जरूरी है |
निष्कर्ष
वैसे तो जीवन में कुछ अपने मन के अनुकुल प्राप्त करना ही
अपने आप में एक बड़ी बात है क्योंकि जी तोड़ मेहनत करने के बावजूद संघर्ष रूप अग्नि
में जल कर ही हम सफलता का स्वाद चखते है और अपने लिए एक मुकाम हासिल करते है जहाँ
सारी सुख सुविधाएँ हमारे लिए सहज और सुलभ प्रतित होती है और हम शुरू शुरू में ही उसमें इतना
डूब जाते है कि डूबे रहने की आदत सी हो जाती है जिसके परिणाम स्वरूप हमारी प्रवृति
में ही स्वयं से कुछ ना करने जैसे गुण का विकास होने लगता है जो हमारे स्वास्थ्य
के लिए जहर समान है ऐसी स्थिति में हम इसीलिए पहूँच जाते है क्योंकि आवश्यकता से
अधिक सुविधाओं का उपयोग करने लगते है इसीलिए इससे बचने के लिए कुछ ना कुछ स्वयं भी
करते रहने का प्रयास करना चाहिए और उतनी ही सुविधाओं को अपनी जीवन शैली में जगह
देने का प्रयास करें जितना आपको नितांत जरूरी लगें ..
जैसे – आप एक ग्लास पानी खुद भी ले सकते है या आप अपने कपड़े आलमारी से खुद भी निकाल सकते है इत्यादि छोटी – छोटी जरूरतों को आप अगर स्वयं पूरा करने लगेंगे तो सुविधाओं या साधनों के बोझ तले दबने से खुद को बचा सकेंगे |
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