#वैशाली महोत्सव #वैशाली महोत्सव के बारे में #vaishali mahotsav #vaisali mahotsav ke bare men

चित्र
भूमिका संत रविदास जी ने भी क्या खूब कहा है- “मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है” जैसे कि हमारे वर्द्धमान, जो अपने कर्म से भगवान महवीर बनें और जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर के रूप में प्रतिष्ठित हुए | अहिंसा परमो धर्म : जैसे उपदेश देकर जनमानस के लिए एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में सामने आए, की पुजनीय, बंदनीय हो गए | ऐसे धरती के लाल के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर प्रत्येक वर्ष वैशाली वासी, वैशाली महोत्सव मनाकर भगावन महाबीर के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था प्रकट करते है और वैशाली वासी बड़े प्यार से कहते है -       हम भगवान महाबीर की शुभ जयंती मनाते है,       हम आस्था भगवान महाबीर के प्रति दिखाते है “ |   वैशाली महोत्सव मनाने की परम्परा की शुरुआत स्वर्गीय जगदीश चंद्र माथुर हाजीपुर के एक तत्कालीन अनुमंडलाधिकारी थे, जिनके हृदय में वैशाली के महत्व और महत्ता की ऐसी अखंड ज्योत जल रही थे, जिसके प्रकाश से अभिभूत होकर वैशाली के प्रति अपनी आस्था को, वैशाली महोत्सव मनाने की परम्परा के रूप में प्रकट कर दिया और वैशाली की मिट्टी की खुश...

स्वप्न क्या है और क्यों आते है...?


स्वप्न क्या है और क्यों आते है इसको जानने से पहले हम थोड़ा ये जानने की कोशिश करते है कि स्वप्न का अर्थ क्या होता है क्योंकि जब तक हम किसी भी शब्द का या हमारे जीवन में घटित होने वाली किसी भी घटनाओं का मतलब ही नहीं जानेंगे तब तक उसके बारे में हम क्या समझेंगे और क्या बतायेंगे ..वैसे तो स्वप्न का अर्थ या मतलब स्वप्न शब्द से ही समझ में आता है फिर भी हम इसके अर्थ को विस्तार पूर्वक समझने की कोशिश करते है ताकि किसी प्रकार का कोई संशय शेष ना रह जाये .. तो

स्वप्न का अर्थ ही होता है अपनी किसी भी प्रकार की हसरत या चाहत को हकीकत बनते या बिगड़ते अपनी बंद आँखों से ( यहाँ बंद आँखों का मतलब नींद में होने से है ) कल्पना के सागर में डूबकी लगाकर सदृश्य देखना ..



और स्वप्न का एक दूसरा अर्थ भी होता है अपने किसी हसरत या चाहत के लिए लालायित रहना या होना लेकिन इस प्रकार के स्वप्न हम खूली आँखों से ही देख सकते है ( यहाँ खूली आँखों से देखना हमरी जागृत अवस्था का घोतक है ) और मेरी समझ से स्वप्न के ये दो ही प्रकार होते है |



अब हमने स्वप्न का अर्थ तो समझ लिया लेकिन स्वप्न के अर्थ को समझने के दौरान एक सवाल जो हमारे मन में आया है वो आप सब के मन में भी आ सकता है कि ख्वाबी पुलाव पकाना जैसे मुहावरे के अर्थ पर भी अगर हम गौर करने की कोशिश करते है तो उसके अर्थ भी कुछ स्वप्न के अर्थ जैसे ही प्रतित होते है तो क्या स्वप्न और ख्वाबी पुलाव पकाना एक दूसरे से भिन्न नहीं है .. और अगर भिन्न नहीं है तो कैसे नहीं है ..

तो मेरी समझ से स्वप्न जहाँ हमें अच्छी नींद के दौरान हमारे दिमाग में चल रहे अच्छे बुरे घटित घटनाओं के प्रतिफल स्वरूप हमारी कामना की पूर्ति या पूर्ति नहीं होने के साक्षात दृश्य दिखाती है जबकि ख्वाबी पुलाव पकाना हमारे मन के द्वरा रची गई एक काल्पनिक फिल्म के समान होती है जिसका न तो कोई सिर और ना ही कोई पैर होता है जो सिर्फ और सिर्फ हमारा बक्त बरबाद करता है और कुछ नहीं इसीलिए ख्वाबी पुलाव पकाने से हमारे बड़े हमें रोकते है लेकिन सपने को आने से ना तो कोई रोक सकता है और ना ही कोई मना कर सकता है

खैर अब हम अपने मुख्य बिन्दु पर आते है कि स्वप्न क्या है और क्यों आते है

तो आइये अब हम स्वप्न की दोनों प्रकार की स्थिति से स्वप्न क्या है और क्यों आते है पर विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण डालने का प्रयत्न करते है .

तो सबसे पहले खूली आँखों से जो हम स्वप्न देखते है वो हमारे जीवन पे क्या प्रभाव डालती है आइये जानने की कोशिश करते है ... 

खूली आँखों का स्वप्न एक प्रकार की ऐसी मानसिक स्थिति है जो हमें कभी सफलता के प्रति तो जो कभी हमें किसी ना किसी वस्तु के प्रति तो जो कभी हमें अपनी उन्नति के प्रति आकर्षण पैदा करने का काम करती है जो हमारे शिथिल पैरों या डगमगाती हमारी इच्छा शक्ति को मजबूती प्रदान करती है ताकि हम आगे बढकर अपनी मंजील प्राप्त करने के लिए तब तक बढ़ते रहे जब तक हम मंजील पर पहूँच ना जाये |



अब हम स्वप्न की दूसरी स्थिति यानि बंद ‘आँखों के स्वप्न’ जो हमारी जिन्दगी पर क्या प्रभाव डालती है के बारे में जानने की कोशिश करते है ..

तो बंद आँखों का स्वप्न भी एक प्रकार की ऐसी मानसिक स्थिति है जो हमारी एकाग्रता बढाते हुए हमारी बुद्धि को भी कुशाग्र बनाती हुई हमें इस काविल बनाती है की हम जो भी कार्य करें उसे कुशलता के साथ करने के लिए प्रयत्नशील रहें क्योंकि इस प्रकार के स्वप्न ही अच्छी नींद आने का कारक तत्व होता है अब हमें इस बात से कोई लेना देना नहीं है कि हम स्वप्न में क्या देखते है क्या नहीं हमें बस अच्छी नींद से मतलब है |

 

निष्कर्ष

स्वप्न जिस भी प्रकार के हो चाहे खूली आँखों के हो या बंद आँखों के हो हमारी उन्नति में सबसे बड़ा हाथ इन्हीं का होता है इसीलिए सपने जरुर देखने चाहिए क्योंकि जबतक हम सपने नहीं देखेंगे उसे पूरा कैसे करेंगे |   

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

#Rose and its requirements# Rose and its usefulness

#buvneshwar ek najar men #भुवनेश्वर एक नजर में #नाटककार भुवनेश्वर के बारे में

#वैशाली महोत्सव #वैशाली महोत्सव के बारे में #vaishali mahotsav #vaisali mahotsav ke bare men