#वैशाली महोत्सव #वैशाली महोत्सव के बारे में #vaishali mahotsav #vaisali mahotsav ke bare men
रिश्ता चाहे दोस्ती का हो , रिश्ता चाहे प्यार
का हो , रिश्ता चाहे मातृत्व का हो ,रिश्ता चाहे पितृत्व का हो ,रिश्ता चाहे खून
का हो और यहाँ तक की रिश्ता चाहे औपचारिक ही क्यों ना हो सब रिश्तों की नींव संचार
पर ही टिकी होती है और रिश्तों की अहमियत ही हमें रिश्तों की डोर थामे रखने में
हमारी मदद करती है जिससे हम किसी भी रिश्तें को निभाने के प्रति सजग और सरल रह
पाते है और रिश्तों में संचार को बनायें रखते है |
कहते है किसी भी रिश्तों में दरार आने के या
बिगड़ने के प्रमुख कारण है हर प्रकार के संचार का बंद हो जाना क्योंकि बातें करते
रहने भर से ही बिगड़ी से बिगड़ी बात भी बन जाती है और जब बातें ही नहीं होगी तो
रिश्तों में दूरियाँ तो आप ही हो जायेगी इसीलिए मेरी समझ से रिश्तों को बचाये रखने
के लिए जरूरी है की अपने रिश्तों में संचार के हर रास्ते को खूले रखने चहिए भले
रिश्ते क्यूँ ना बिगड़ते ही जा रहे हो ..
ऐसा नहीं है कि सिर्फ बिगड़ी बातें को बनाने के
लिए ही हमें संचार की आवश्यकता होती है संचार की आवश्यकता हमें रिश्ते बनाने से
लेकर रिश्तों को निभाने या निभाते रहने तक के लिए महसूस होती है इसको थोड़ा और
विस्तार से समझने की अगर हम कोशिश करें तो नीचे दिये गये उदाहरण के माध्यम से हम
समझ सकते है |..
जैसे हम अगर थोड़ा अपने दिमाग पर वल देकर सोचने
की कोशिश करें कि रिश्ते बनते कैसे है तो हम जानने लगेंगे कि किसी भी रिश्ते के
बनने के पीछे भी संचार की ही मुख्य भूमिका होती है जैसे
जब हम किसी से मिलते है या बराबर मिलते रहते है
तो उससे जान – पहचान बनाने या बढ़ाने के लिए या यूँही औपचारिकता के लिए भी तो हम
बात ही शुरू करना चाहते है और जब एक दुसरे की बातें एक दूसरे को अच्छी लगने लगती
है तो बातें सामने होते हुए मोबाईल फोन से भी होनी शुरू हो जाती है और तब जाके
किसी रिश्ते की नींव पड़ती है या पड़ने लगती है जब किसी रिश्तें की नींव ही संचार से
बनी हो तो वो रिश्ता बिना संचार के कैसे बना रह सकता है और संचार ही एक ऐसा माध्यम
भी है जिससे हम अपनी अभिव्यक्ति को किसी के सामने व्यक्त भी कर सकते है |
निष्कर्ष
किसी भी रिश्तें को बनाने से लेकर बनाये रखने
के लिए हमारे जीवन में संचार की अहम भूमिका होती है लेकिन कभी – कभी अत्यधिक कटू
संवाद की वजह से रिश्ते टूटने भी लगते है या टूटने की कगार पर होते है इसीलिए
रिश्ते को टूटने से बचाने के लिए अपने संचार पर भी अंकुश रखना जरूरी है क्योंकि
जुवान से निकली हुई कोई बात वापस नहीं हो सकती है और जुवान में वो ताकत है कि किसी
भी स्थिति को अपने अनुरूप बना सकती है तो क्यूँ ना हम रिश्तों को बचाने के लिए
अपनी अच्छी जुवां का सदा उपयोग करते रहें क्योंकि किसी भी रिश्ते के बनने के पीछे एक
दूसरे की भावनायें जुरी होती है इसीलिए रिश्तों की अहमियत को समझना जरूरी है |
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