#वैशाली महोत्सव #वैशाली महोत्सव के बारे में #vaishali mahotsav #vaisali mahotsav ke bare men
ऐसा हम मानते
है या ऐसा हम समझते है की
प्रगतिशील होना जीवन को सार्थक बनाता है क्योंकि जीवन अगर प्रगतिशील है तो इसमें
कुछ ना कुछ बदलाब निरंतर देखने को मिलेगा, जिसके कारण ठहरे हुए पानी की तरह
जीवन कभी बर्बाद नहीं होगा,जीवन का बर्बाद नहीं होना, ये इशारा करता है की जीवन
प्रगतिशील है और समय के
साथ बदलने को या चलने को तैयार है |
जीवन अगर प्रगतिशील है तभी आवश्यकताओं का जन्म होगा और उसकी पूर्ति के लिए
उद्धम होंगे या
समय के साथ चलने में सक्षम होंगे |
जीवन अगर प्रगतिशील है तो हम अपने जीवन जीने के तरीकों को समय के साथ सुदृढ़
एवं बेहतर करते जायेंगे ,मेरी समझ से इसी दिशा में एक कदम है ‘अर्थव्यवस्था का
डिजिटलीकरण’ जिसके बारे में आज हम इस ब्लॉग के माध्यम से जानने की कोशिश
करेंगे |
डिजिटलीकरण
क्या है और ये कैसे काम करता है |
इंटरनेट के माध्यम से संचालित होने वाली कार्य प्रणाली , एक प्रकार की डिजिटल कार्य
प्रणाली होती है,जिसके माध्यम से किसी भी प्रकार की सूचना एवं किसी भी प्रकार के
दस्तावेज को डिजिटली रूप से सुरक्षित रखा जाता है | जब इसका व्यापक स्तर पर या
पूर्णत: किसी भी क्षेत्र में इस्तेमाल होना शुरू हो जाता है तो अमूमन हम ये समझने
लगते है की इस क्षेत्र का डिजिटलीकरण हो गया है |किसी भी क्षेत्र का डिजिटलीकरण
होना ये सुनिश्चित करता है की बिना किसी देरी के उस क्षेत्र से सम्बंधित किसी भी
कार्य का पूर्ण निष्पादन किया जायेगा और उसमें गड़बड़ी की सम्भावना नगण्य होगी
,अर्थात भोरेसेमंद सेवा प्रदाता के रूप में चिन्हित होना सुनिश्चित होगा |
अर्थव्यवस्था
अर्थव्यवस्था यानि जिसमें अर्थ की व्यवस्था निहित हो या आर्थिक गतिविधयों को
संचालित करने की पद्धति जो की अर्थव्यवस्था शब्द से भी प्रतीत होता है ,लेकिन
अर्थव्यवस्था को यदि और सरलता से परिभाषित करें तो अर्थव्यवस्था एक ऐसी
व्यवस्था है जो हमारी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाती है क्योंकि ये हमें व्यवस्थित
तरीकों से अपने जीवन को जीना
सिखाती है |
अर्थव्यवस्था मुख्य
रूप से प्राथमिक क्षेत्र,द्वितीयक क्षेत्र एवं तृतीयक क्षेत्र का घोतक है |
प्राथमिक क्षेत्र में कच्चे माल के उत्पादन इत्यादि शामिल होते है द्वितीयक क्षेत्र ,
प्राथमिक क्षेत्र के कच्चे माल का इस्तेमाल कर नये माल का विनिर्माण करती है, वहीं
तृतीयक क्षेत्र सेवा क्षेत्र है, जिसके माध्यम से बैंकिग ,वीमा इत्यादि सेवाओं का संचालन होता है |
हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की अहम भूमिका है जिसका वर्तमान में
सकल घरेलू उत्पाद में 53.6 प्रतिशत की भागीदारी है |
अर्थव्यवस्था
का डिजिटलीकरण
अर्थव्यस्था
के डिजिटलीकरण का प्रसार प्राथमिक क्षेत्र में भी देखने को खूब मिलता है जैसे –
पहले खेती करने से लेकर फसल को बेचने तक में किसानों को दिक्कत होती थी, लेकिन अब
किसान कॉल सेंटर के माध्यम से खेती करने से सम्बंधित सारी जानकरी ससमय उपलब्ध हो
जाती है वो भी बिल्कुल मुफ्त और फसल का मूल्य भी निर्धारित होता है जिससे किसान
अपने फसलों का अच्छा मूल्य भी प्राप्त कर सकते है |
अर्थव्यवस्था
का पूर्णत: डिजिटलीकरण की दिशा में ही भारत सरकार की एक योजना, डिजिटल इंडिया है
जिसकी शुरुआत 1 जुलाई 2015 को हुई है , जिसके
द्वारा प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकार के विभिन्न विभागों में सरकारी क्रिया –
कलापों में सुधार यानि ई-शासन या ई गवर्नेस व्यवस्था का आस्तित्व ,ई क्रांति,बेहतर
इंटरनेट सेवा इत्यादि के साथ – साथ युवाओं को विभिन्न स्टार्ट अप , डिजिटल सेवा
केंद्र ,csc इत्यादि खोलने के लिए भी प्रोत्साहित करती है |
निष्कर्ष
जब किसी भी
देश की कार्यप्रणाली बेहतर होगी तो दिन प्रति दिन देश की आर्थिक स्थिति भी बेहतर
होगी, इसीलिए
अर्थव्यवस्था
का डिजीटलीकरण होना भी एक बेहतर कार्यप्रणाली को दर्शाता है क्योंकि जहाँ पहले
किसी भी रिकॉर्ड को मेंटेन रखने के लिए काफी परेशानीयों का सामना करना पड़ता था, वहीं
आज कोई रिकॉर्ड डिजिटली रूप से सुरक्षित भी है और विश्वसनीय भी |
बिचौलियों के क्रिया – कलापों पर अंकुश लगाने के एक अच्छे विकल्प के दृष्टिकोण से भी, अर्थव्यवस्था का डिजीटलीकरण होना एक सशक्त व्यवस्था को स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम प्रतीत होता है |
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें